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अहमदाबाद प्लेन क्रैश: जब मौत सामने थी और इंसानियत खड़ी हो गई।

अहमदाबाद प्लेन क्रैश: हादसे के बाद इंसानियत की ऊंची उड़ान। 

16 जून 2025, सुबह के करीब 9:12 बजे…
अहमदाबाद एयरपोर्ट से कुछ किलोमीटर दूर एक चार्टर्ड प्लेन ने जैसे ही इमरजेंसी लैंडिंग की कोशिश की, वह रिहायशी इलाके में क्रैश हो गया। चारों ओर अफरा-तफरी, धुआं, चीखें, और फिर… एक के बाद एक दिल को दहला देने वाले दृश्य।

लेकिन जैसे ही ये मंजर कैमरे में कैद हुआ और सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, एक और कहानी उभरकर सामने आई – इंसानियत की कहानी, जहां लोग अपनी जान की परवाह किए बिना दौड़ पड़े… किसी को बचाने, किसी बच्चे को गोद में उठाने, किसी को आग से निकालने।

धुएं के उस पार – जिंदा बची उम्मीदें

जिस वक्त प्लेन क्रैश हुआ, वो कॉलोनी सोसाइटी की बालकनी में बैठे कई लोग चाय पी रहे थे, कोई अपने बच्चों को स्कूल भेज रहा था, तो कोई वर्क फ्रॉम होम के लिए लैपटॉप खोल रहा था। और अचानक ज़मीन हिली, एक तेज़ धमाका, और फिर धुआं ही धुआं।

वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि कैसे बिल्डिंग की एक चौथी मंज़िल की बालकनी से एक महिला अपने बच्चे को नीचे फेंकती है – लेकिन डरिए मत, नीचे खड़े लोगों ने उसे पूरी तरह पकड़ लिया।

इस वीडियो ने सिर्फ एक मां की बेबसी नहीं दिखाई, बल्कि आस-पास के लोगों की बहादुरी और तैयार मदद को भी साबित कर दिया।


कैसे लोगों ने बनाया ‘मानव-चेन’

एक और वीडियो में देखा गया कि कैसे हादसे की जगह के पास खड़े कुछ युवाओं ने मानव श्रृंखला (human chain) बनाई, ताकि अंदर फंसे लोग एक-दूसरे के सहारे बाहर निकल सकें।

“हमें किसी ने नहीं बुलाया, लेकिन जब हमने धुआं देखा और बच्चों की चीखें सुनी, तो दौड़ पड़े,” – ये शब्द हैं अर्जुन पटेल के, जो पास ही के मेडिकल स्टोर पर काम करते हैं।
अर्जुन ने न सिर्फ तीन बच्चों को बाहर निकाला, बल्कि एक घायल व्यक्ति को अपनी बाइक पर बैठाकर हॉस्पिटल तक भी पहुंचाया।


हम एम्बुलेंस का इंतजार नहीं कर सकते थे – एक गवाह की जुबानी

एक चश्मदीद रेहाना बानो, जो पास की बिल्डिंग में रहती हैं, ने बताया:
“एक बच्चा तीसरी मंज़िल की खिड़की से रो रहा था। एक लड़के ने बिना कुछ सोचे-समझे पाइप पकड़कर चढ़ाई की और उसे नीचे लाया। हम सब चीख रहे थे, लेकिन वो बिल्कुल शांत था। बाद में पता चला कि वो फायरमैन भी नहीं, एक स्टूडेंट था।”

ये वो लम्हे थे जब कोई वर्दी नहीं थी, कोई पहचान नहीं थी – सिर्फ इंसान थे और उनका दिल।

जब एक बच्ची को बचाने के लिए छह लोग झुलस गए

क्रैश के बाद लगी आग धीरे-धीरे दूसरी बिल्डिंग तक फैल रही थी। तभी एक कमरे में बंद 3 साल की बच्ची की रोने की आवाज़ आई।
पास ही खड़े लोगों ने बिना देरी किए आग बुझाने के लिए बाल्टी, पानी और गीले कपड़े का सहारा लिया।
जब तक दमकल की गाड़ी पहुंची, तब तक 6 लोगों के हाथ और चेहरे जल चुके थे, लेकिन बच्ची सुरक्षित बाहर थी।

इस बच्ची का नाम है अन्वी, और सोशल मीडिया पर अब लोग उसे “चमत्कार की बच्ची” कह रहे हैं।



सिर्फ इंसान नहीं, जानवर भी बचाए गए

क्रैश वाली बिल्डिंग में एक पेट-लविंग फैमिली रहती थी जिनके पास तीन कुत्ते और एक बिल्ली थी।
जब आग फैली, तो परिवार तो किसी तरह बाहर निकल गया, लेकिन जानवर कमरे में ही रह गए।
“हम जानवरों को नहीं छोड़ सकते,” – ये कहते हुए एक 16 साल का लड़का और उसकी बहन वापस अंदर गए और उन जानवरों को खिड़की के रास्ते बाहर निकाला।

जो लोग जानवरों से ‘दूरी’ रखते हैं, उनके लिए ये कहानी एक तमाचा है – जिन्हें खुद के बचाव से पहले दूसरों की जान की चिंता थी।

जब छत से गिरे लोग, और किसी ने ‘झपकने’ नहीं दिया हाथ

बालकनी से नीचे कूदते वक्त कई लोग घायल हुए। कुछ लोग छत से लटक गए, और नीचे खड़े लोगों ने अपने हाथों से उन्हें पकड़ने की कोशिश की।
वीडियो में साफ देखा गया कि एक 50 वर्षीय आदमी को 3 लड़कों ने कैच कर लिया – वो सभी जमीन पर गिर पड़े, लेकिन आदमी की जान बच गई।

बाद में अस्पताल में उन लड़कों ने बताया –
“हमें बस एक बात याद थी – अगर हम नहीं पकड़ेंगे, तो शायद वो आखिरी सांस होगी।”

क्रैश के बाद जो किया प्रशासन ने – वो भी सराहनीय

जहां जनता ने अपनी भूमिका निभाई, वहीं अहमदाबाद नगर निगम, फायर ब्रिगेड और पुलिस ने भी बेमिसाल तेज़ी दिखाई।
15 मिनट के अंदर 4 फायर टेंडर मौके पर पहुंच गए।
1 घंटे के अंदर घायलों को 3 बड़े अस्पतालों में पहुंचा दिया गया।

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने खुद घटनास्थल का दौरा किया और हादसे की जांच के आदेश दिए।



सोशल मीडिया ने भी निभाई बड़ी भूमिका

हादसे के वीडियो और फोटो वायरल होते ही सोशल मीडिया पर मदद की अपीलें शुरू हो गईं।
लोगों ने ट्विटर और इंस्टाग्राम पर घायलों के लिए ब्लड डोनेशन की अपील की।
अहमदाबाद की तीन NGOs मौके पर पहुंची और खाने-पानी, कपड़े और कंबल बांटे।

एक NGO वर्कर ने कहा –
“हमने कभी सोचा नहीं था कि मोबाइल और सोशल मीडिया एक दिन जान बचाने का ज़रिया बन जाएगा।”

जब बच्चा बोला – "मम्मी ने कहा था आंख बंद करना और नीचे कूद जाना"

इस हादसे में सबसे ज़्यादा वायरल वीडियो उस छोटे बच्चे का रहा, जो अपनी मां के साथ तीसरी मंज़िल से कूदा।
बच्चा खुद बच गया, मां को मामूली चोट आई।

बच्चे ने कहा –
“मम्मी ने कहा था – आंख बंद करो, और जैसे सुपरहीरो नीचे कूदते हैं, वैसे करना।”

ये सुनकर वहां खड़े पत्रकारों की आंखें भर आईं।
कभी-कभी बच्चे भी हिम्मत की मिसाल बन जाते हैं।

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